आलू कचालू
एक शरारती आलू की मज़ेदार कविता
एक मस्तीभरी पारंपरिक कविता जो बच्चों को हंसाए बिना नहीं छोड़ती।
आलू कचालू बेटा,
कहाँ गए थे?
बैंगन की टोकरी में,
सो रहे थे।
बैंगन ने लात मारी,
रो रहे थे।
मम्मी ने प्यार किया,
हंस रहे थे।
पापा ने पैसे दिए,
नाच रहे थे।
भैया ने लड्डू दिए,
खा रहे थे।
आलू कचालू बेटा,
कहाँ गए थे?
गाजर की टोकरी में,
सो रहे थे।
गाजर ने लात मारी,
रो रहे थे।
मम्मी ने प्यार किया,
हंस रहे थे।
पापा ने पैसे दिए,
नाच रहे थे।
भैया ने लड्डू दिए,
खा रहे थे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आलू कचालू किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त है?
यह कविता 2 से 7 साल के बच्चों के लिए आदर्श है, इसकी सरल भाषा और लयबद्ध शब्दों के कारण।
क्या इस कविता को सुना भी जा सकता है?
हां, इस पेज पर बिल्ट-इन नैरेटर है जो कविता को हिंदी में बोलकर सुनाता है।
क्या यह एक पारंपरिक कविता है?
हां, यह भारत की सबसे प्रिय और जानी-मानी बच्चों की कविताओं में से एक है, जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है।