कौआ
काले रंग के चतुर कौए के बारे में एक छोटी कविता
एक छोटी सी कविता एक चतुर काले पक्षी के बारे में।
काला कौआ कांव कांव करे,
इधर-उधर वो उड़ता फिरे,
चालाकी से चीज़ें ढूंढे,
कांव कांव में बात करे।
घड़े में डाले कंकड़ पत्थर,
पानी ऊपर लाए फिर वो,
चतुराई से प्यास बुझाए,
सब सीखें उससे कुछ हुनर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौआ किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त है?
यह कविता 2 से 7 साल के बच्चों के लिए आदर्श है, इसकी सरल भाषा और लयबद्ध शब्दों के कारण।
क्या इस कविता को सुना भी जा सकता है?
हां, इस पेज पर बिल्ट-इन नैरेटर है जो कविता को हिंदी में बोलकर सुनाता है।
क्या यह एक पारंपरिक कविता है?
हां, यह भारत की सबसे प्रिय और जानी-मानी बच्चों की कविताओं में से एक है, जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है।