सूरज चाचा
रोज़ सुबह उगने वाले सूरज चाचा की कविता
एक सरल कविता हर सुबह हमें जगाने वाले सूरज के बारे में।
सूरज चाचा रोज़ हैं आते,
सुबह-सुबह हमको जगाते,
रोशनी देकर दिन बनाते,
शाम को फिर से घर जाते।
चिड़िया गाएं उनका गाना,
फूल खिलाएं उनका माना,
सारी दुनिया करे सलाम,
सूरज चाचा को शुभ प्रणाम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरज चाचा किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त है?
यह कविता 2 से 7 साल के बच्चों के लिए आदर्श है, इसकी सरल भाषा और लयबद्ध शब्दों के कारण।
क्या इस कविता को सुना भी जा सकता है?
हां, इस पेज पर बिल्ट-इन नैरेटर है जो कविता को हिंदी में बोलकर सुनाता है।
क्या यह एक पारंपरिक कविता है?
हां, यह भारत की सबसे प्रिय और जानी-मानी बच्चों की कविताओं में से एक है, जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है।